बुआ के बेटे ने मेरी आग उगलती चुत को ठंढा किया ..

मैं पढ़ाई पूरी करने के बाद हमेशा घर में रहती हूँ. मैं कभी कभी घर का भी काम कर लेती हूँ, या मैं जब फ्री रहती हूँ तो अपनी सहेलियों के साथ घूमने चली जाती हूँ.



मेरे घर से थोड़ी दूर ही मेरे रिश्तेदार लोग भी रहते हैं. मेरी बुआ का भी घर थोड़ी दूर पर ही है. मेरी बुआ की शादी नजदीक ही हुई है. मेरी बुआ का हमारे घर आना जाना लगा रहता है और वो जब भी मेरे घर आती हैं, तो मुझे भी अपने साथ अपने घर लेकर जाती हैं.

मैं जब बोलती हूँ कि बुआ मैं आपके घर नहीं जाऊँगी, तो वो बोलती हैं कि मैं तेरे घर आती हूँ तो तू मेरे घर क्यों नहीं जाएगी.. इसलिए मुझे भी अपने बुआ के घर जाना पड़ता है.

बुआ का एक लड़का है और वो मेरे उम्र का ही है. वैसे तो शारीरिक रूप से बहुत बलवान दिखता है क्योंकि बुआ उसको खूब खिलाती पिलाती रहती हैं.. और वो कसरत भी करता है.

मैं जब भी बुआ के घर जाती हूँ तो वे मुझे भी खाने के लिए बहुत ज्यादा खाना दे देती हैं. जब मुझसे खाया नहीं जाता है तो बोलती हैं कि मेरा बेटा तो इससे भी ज्यादा खाता है और देख तू इसीलिए पतली है, उसे देख.. वो कितना मोटा है.
मैं बुआ को बोलती हूँ कि लड़के लोग मोटे ही अच्छे लगते हैं.

अब चूंकि बुआ का लड़का जिम भी जाता है, जिस वजह से उसकी बॉडी अच्छी बन गई है. मैं पतली भले ही हूँ लेकिन मेरी चूची और गांड बहुत बड़ी बड़ी हैं. मेरे पतलेपन को मेरी चूची और गांड मिलाकर मुझे सेक्सी बना देती हैं. मेरी चूची का उभार मेरी बुआ का बेटा खूब देखता है.

मेरे बुआ के दो बेटे हैं. एक बेटा तो शरीफ लगता है लेकिन जिसकी बॉडी भरी हुई है, वो मुझे थोड़ा बेशर्म लगता है. जब भी मैं बुआ के घर उसके सामने पड़ जाती हूँ, वो मेरी चूची के उभार को घूर कर देखता है और मेरी उठी हुई गांड भी देखता है.

एक दिन मेरी मम्मी और बुआ दोनों लोग रिश्तेदारी में गई थीं और वो लोग मुझसे बोलकर गई थीं कि वो लोग जल्दी आ जाएंगी.
मम्मी मुझसे बोलीं कि बुआ के बेटे को खाना बनाकर खिला देना.
बुआ अपने छोटे वाले बेटे को अपने साथ लेकर मम्मी के साथ रिश्तेदार की शादी में गई थीं. मुझे लगा कि वो लोग शाम तक आ जाएंगी, इसलिए मैं बुआ के लड़के को खाना बना कर बुआ के घर चली गई.

वो घर में अकेला था, मैंने उसको खाना खिलाया और उसके खाना खाने तक मैं वहीं बैठ गई. जब मैं जाने लगी तो उसने मुझे अपने घर ही रोक लिया. मैं भी ये ठीक समझी क्योंकि बुआ और मम्मी तो शाम को आने वाली थीं, तो मैं भी अपने घर में अकेले अकेले बोर हो जाती.

मेरी सहेलियां भी जॉब पर गई थीं, तो मेरी कोई सहेली भी उस वक्त अपने घर पर नहीं थी.. इसलिए भी मैं अपने बुआ के घर रुक गई. मैं और बुआ का लड़का हम दोनों लोग इधर उधर की बातें करने लगे और ऐसे ही शाम हो गई थी.

मैंने अपने लिए और अपने बुआ के बेटे के लिए चाय बनाई और अपने बुआ के बेटे से पूछने लगी कि मम्मी और बुआ कब तक आएंगी, कुछ मालूम है?
बुआ का बेटा बोला कि वो लोग तो देर रात तक ही आएंगी.


अब मुझे बहुत बेचैनी हो रही थी क्योंकि ज्यादा शाम हो गई थी और बुआ और मम्मी के आने का अब तक कोई फोन भी नहीं आया था. मुझे डर भी लग रहा था क्योंकि मैं कभी अकेले अपनी बुआ के लड़के के साथ नहीं रही थी. वो मुझे बेशर्म लगता था, लेकिन क्या करूँ बुआ का लड़का था तो मैं उससे बातें कर लेती थी लेकिन मैं उसके साथ अकेले घर में नहीं रहना चाहती थी.

मैं सोच रही थी कि अगर मम्मी और बुआ नहीं आएंगी तो मैं इधर कैसे रहूंगी.
मैंने मम्मी को फ़ोन किया तो वो बोलीं कि उन लोगों को आने में रात हो जाएगी इसलिए वो लोग कल सुबह आएंगी.
मैंने मम्मी को कहा कि आप लोग तो मुझसे बोली थीं कि आप लोग शाम को आ जाओगी?
तो मम्मी बोली कि क्या करूँ बेटा शादी का घर है न.. यहाँ लोग हमें रोक रहे हैं और हम लोगों को आने में ज्यादा रात हो जाएगी.. इसलिए हम लोग सुबह ही आ पाएंगे. तब तक तुम एक रात बुआ के बेटे के साथ रह लेना. तुम उसको भी खाना बनाकर खिला देना और अपने भी खाना बनाकर खा लेना.


यह बात मैंने अपनी बुआ के लड़के को बताई कि मैं मम्मी से फ़ोन पर बात की थी तो वो बोलीं कि वो और बुआ दोनों लोग कल सुबह तक ही आ पाएंगी. तुम बाजार चले जाओ और उधर से कुछ सब्जियां वगैरह लेकर आओ, मैं खाना बना देती हूँ.. तो हम लोग खाना बनाकर सो जाएंगे.

बुआ का लड़का बोला- तुम खाना मत बनाओ, मैं बना हुआ खाना बाहर से लेकर आता हूँ.
मुझे उसका ये आईडिया अच्छा लगा. मैंने हामी भर दी. बुआ का लड़का बाहर से खाना लेकर आया और हम दोनों खाना खाने के बाद एक दूसरे से थोड़ी बातें करने लगे.

मुझे अकेले रहने में डर लगता है इसलिए मैं अपने बुआ के लड़के से बात कर रही थी. मैं सोच रही थी कि कम से कम ये रात तो निकल जाए. बुआ का लड़का मुझसे बात कम मेरी चूची को ज्यादा देख रहा था. मुझे लग रहा था कि वो मेरे बारे में कुछ दूसरी बात ही सोच रहा है. मुझे एक उपाय समझ आया, मैंने सोचा कि अपना डर खत्म करने के लिए टीवी देख लेती हूँ. शायद रात निकल जाए या टीवी देखते देखते मुझे नींद लग जाए क्योंकि मुझे अकेले में नींद भी नहीं लगती है.

मैं टीवी देखने लगी, तो मेरी बुआ का लड़का भी साथ में टीवी देखने आ गया. मैं उसको देख कर एकदम हैरान हो गई. वो केवल अंडरवियर में टीवी देखने आ गया था. उसको इस तरह से देख कर एक बार तो मैं भी उसको वासना की नजरों से देखने लगी थी. लेकिन फिर मैं उसको डांटने लगी कि क्या भाई.. तुम अंडरवियर में टीवी देखने आ गए?

वो बोला कि हां क्यों क्या हुआ? मैं रात को ऐसे ही टीवी देखता हूँ.
मुझे उसके लंड का आकार एकदम साफ़ दिखने लगा था. मैं उससे बोली कि अंडरवियर के ऊपर कुछ पहन लो.
वो बोला कि नहीं, मैं ऐसे ही टीवी देखता हूँ.


मैं उसको बोली कि ठीक है तुम टीवी देखो, मैं सोने जा रही हूँ.
फिर वो एक लोअर पहन कर आया. वो मुझे बॉडी दिखा रहा था और टीवी देख रहा था. मुझे अब टीवी भी देखने का मन नहीं कर रहा था. मुझे चुदाई वाले ख्याल आने लगे. 

मुझे बुआ के लड़के का लंड का आकार दिखने लगा और मैं अन्दर ही अन्दर कब चुदासी हो गई, मुझे पता ही नहीं चला. मुझे अब चुदवाने का मन कर रहा था. बुआ का लड़का भी शायद यही चाह रहा था कि मैं उसके लंड के आकार को देख कर गरम हो जाऊं, इसलिए तो वो अंडरवियर में टीवी देखने आया था.

वो मुझे देख कर समझ गया कि मैं गरम हो गई हूँ क्योंकि मैं भी टीवी पर रोमांटिक वाले सीन बहुत ध्यान से देख रही थी और अपने बुआ के लड़के को भी देख रही थी.

वो मेरी बगल में आकर बैठ गया और मेरी तारीफ करने लगा- तू मुझे बहुत सुन्दर लगती है.
मुझे उसकी तारीफ करना बहुत अच्छा लग रहा था. वो मेरी तारीफ पर तारीफ किये जा रहा था. तभी उसने मेरे हाथों को पकड़ लिया और मेरी नजरों में नजरें डाल कर मेरी तारीफ करने लगा. उसने मेरे होंठों की तारीफ की, मेरी आँखों की तारीफ की, मेरे बालों की तारीफ करने लगा.


मैं भी अब थोड़ा रोमांटिक हो रही थी. वो मेरी तारीफ करते करते मुझे अपनी ओर खींचने लगा और उसने मुझे गले लगा लिया. मुझे न जाने क्या हुआ कि मैंने उसकी इस हरकत का कोई विरोध ही नहीं किया.

अब उसने मुझे अपनी बाँहों में समेट लिया और मेरी पीठ को सहलाने लगा. वो मेरे कान को अपनी जीभ से चाटने लगा और मैं मदहोश होने लगी. मैं बुआ के बेटे को दूर करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसने मुझे कस कर गले लगाया हुआ था, इसलिए मैं उससे अलग भी नहीं हो पा रही थी. उसने अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिए और मेरे होंठों को चूसने लगा.

कुछ पल बाद मैं भी उसका साथ देने लगी और हम दोनों लोग बहुत देर तक एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे. वो मेरी कुर्ती को निकालने को बढ़ा और पीछे से मेरी कुर्ती के हुक को खोलने लगा. अगले ही पल उसने मेरी कुर्ती को निकाल दिया. अन्दर मैंने सफ़ेद कलर की ब्रा पहनी थी. उसने मेरी ब्रा को निकाल दिया और मेरी चूची को अपने हाथों में लेकर जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया.
मैं कामुक आवाजें निकलने लगी पर मैं उससे बोली कि मैं ये सब नहीं कर सकती.

तो वो मुझसे बोला कि तुम डर क्यों रही हो मैंने कंडोम रखा हुआ है.
मैं हैरान हो गई, तो उसने मुझे बताया कि वो अपनी गर्लफ्रेंड को भी चोदता है तो कंडोम लगा कर चोदता है. इसलिए वो कंडोम हमेशा रखता है.
अब मुझे थोड़ा ठीक लगने लगा था. तभी उसने मेरी सलवार को भी निकाल दिया. मैं काले रंग की पेंटी में थी.

वो मुझे देख कर बोल रहा था कि क्या मस्त माल है रे तू.. और अगले ही झटके में उसने मेरी पेंटी को निकाल दिया.

मैं नंगी हो गई और वो भी नंगा हो गया. हम दोनों लोग नंगे ही एक दूसरे को गले लगाने लगे. वो अपना लंड मेरे मुँह में डालने लगा. मैं उसको मना कर रही थी कि नहीं मैं ये नहीं करूँगी तो वो बोला कि उसकी गर्लफ्रेंड उसका लंड बड़े मजे से चूसती है, इसमें मजा आता है.

तो मैं भी उसके लंड को चूसने लगी. कुछ ही देर में मुझे लंड चूसना अच्छा लगने लगा और मैं उसके लंड को बेशर्मों की तरह बहुत देर तक चूसती रही. वो 69 में हो कर मेरी  चूत में अपनी जीभ डाल कर मेरी चूत को चाटने लगा.

मैं मदहोश हो कर आहें भरने लगी. अब हम दोनों लोग एकदम चुदाई के खेल में में लग गए थे. वो मेरी चूत को अपनी जीभ से चाट रहा था और मैं आहें भर रही थी.

तभी वो उठा और अपनी मेज की दराज से एक कंडोम निकाल लाया. उसने मेरे सामने अपने लंड पर कंडोम लगाया. मैं बिस्तर पर चुपचाप लेटी उसको देख रही थी और अपनी बुआ के लड़के के खड़े लंड को देख रही थी. वो अपने लंड पर कंडोम लगाने के बाद मेरे ऊपर आ गया. मेरे ऊपर आकर वो अपने जिस्म से मेरे जिस्म को रगड़ने लगा. मेरी चूत में अपना लंड रगड़ने लगा. मैं भी एकदम चुदासी हो गई थी. मैंने अपनी चूत खोल दी और बोलने लगी कि मुझे चोदो.

मेरा भाई भी अब चुदाई करने के लिए बेचैन हो गया था. वो अपने लंड पर कंडोम लगाया था और उसका खड़ा लंड कंडोम की वजह से एकदम चमक रहा था. वो अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगा. वो मेरी टांगों को फैला कर जांघों के बीच में आ गया और अपना लंड मेरी चूत में घुसाने लगा. मैं भी कसमसा रही थी कि ये जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डाल दे और मुझे चोद दे. मैं भी चुदवाने के लिए एकदम गरम और चुदासी हो गई थी.

भाई अपना लंड मेरी चूत में डाल रहा था तो उसका लंड मेरी चूत से फिसल जा रहा था. मैंने उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर लगा दिया और उसको इशारे में बोली कि अब मेरी चूत में लंड डालो.

उसने एक झटका देते हुए मेरी चूत में लंड डाला तो उसका लंड मेरी चूत में चला गया और वो मुझे चोदने लगा. मुझे हल्का सा दर्द हुआ लेकिन कुछ देर बाद मैं भी अपनी गांड को नीचे से उछाल कर उसका लंड अपनी चूत में लेने लगी थी. मस्त चुदाई होने लगी थी और मैं अपनी बुआ के लड़के का साथ दे रही थी.

वो मेरी चूत को बहुत अच्छे से चोद रहा था. हम दोनों लोग बहुत देर तक चुदाई कर रहे थे. हम दोनों लोग की चुदाई करते करते एक दूसरे को गले लगा रहे थे. वो मुझे कुछ देर चोदने के बाद अलग हो गया अब उसने मुझे घोड़ी बना कर चोदना शुरू कर दिया. हम दोनों लोग इतने अच्छे से चुदाई कर रहे थे कि जैसे लग रहा था कि हम दोनों लोग बहुत दिन से एक दूसरे के साथ चुदाई करते रहे हैं.

हम दोनों लोग चुदाई के बीच बीच में एक दूसरे को किस भी कर रहे थे. मुझे घोड़ी बना कर चोदने के बाद उसने मुझे अपने लंड के ऊपर बैठ लिया और मुझे चोदने लगा.

आधा घंटे तक हम दोनों लोग चुदाई करने के बाद झड़ने को हो गए. कुछ ही देर बाद हम दोनों लोग चुदाई करते हुए झड़ गए.
हम दोनों चुदाई करने के बाद एक दूसरे को किस किया. उसने मुझे ‘आई लव यू..’ बोला और मैं भी उसको ‘आई लव यू टू..’ बोली और हम दोनों लोग नंगे एक दूसरे को गले लगाकर सो गए.

एक घंटे बाद हम दोनों ने उठ कर फिर से चुदाई चालू कर दी. उस रात मम्मी और बुआ के न होने से मैंने अपनी बुआ के बेटे के लंड से चुद कर बहुत मजा लिया.
अब जब भी बुआ का लड़का और मैं जब भी मौका पाते हैं, हम दोनों लोग चुदाई करने लगते हैं. हम दोनों भाई बहन चुदाई के हर तरह के आसन को इस्तेमाल करते हुए चुदाई का मजा लेते हैं.

आप सबको मेरी ये सच्ची सेक्स की कहानी कैसी लगी? आप सब मुझे मेल करके बताईये, अगर मुझे अच्छा फीडबैक मिला तो मैं अगली कहानी बहुत जल्द आपको बताऊँगी.

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ